BSF जवान नरेंद्र नाथ धर दुबे जिनके शरीर में सा गोली लगे और एक अभी भी उनके शरीर में ही फंसा हुआ ऐसे वीर योद्धा के बारे में जाने की इच्छा है किसी को होती है तो लिए हम उनके बारे में विस्तार से जानते हैं।

आज हमें एक ऐसे BSF जवान के बारे में बात करना जाए, जिनकी आदित्य साहस को देखकर ऐसा लगता है कि यह कोई फिल्मी है। एक ऐसी व्यक्ति जो एक शिक्षक बनना चाहते थे लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। पहले हुआ उत्तर प्रदेश पुलिस सब इंस्पेक्टर के रूप में काम किया फिर उन्होंने बीएसएफ को ज्वाइन किया।
जानवरों ने कई सारे ऑपरेशन को अंजाम दिया उनमें से प्रमुख है गाजी बाबा ऑपरेशन जिसने संसद भवन और विधानसभा पर हमला किया था। इस ऑपरेशन के दौरान उन्हें सात गोलियां लगी थी लेकिन फिर भी वह हिम्मत नहीं हारी और इस ऑपरेशन को सफल बनाया जिसमें गाजी बाबा मर गया। आपको या भी बता दे कि आज भी उनके शरीर में एक गोली फांसी हुई है।
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नरेंद्र नाथ धर दुबे का जन्म और प्रारंभिक जीवन (Narendra Nath Dhar Dubey birth and early life)
नरेंद्र नाथ धर का जन्म भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के गोरखपुर जिले में एक हिंदू परिवार में हुआ था। इनका जन्म एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। पिता एक लेक्चरर थे, उनके दादाजी एक आजाद हिंद फौज के अधिकारी थे जिन्होंने देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़े थे। और उनके दादाजी का भाई जो संस्कृत के विद्वान थे। नरेंद्र अपने दादाजी से काफी प्रभावित थे और वह भी एक सैनिक बनाना चाहते हैं।
नरेंद्र नाथ धर दुबे का शिक्षा (Narendra Nath Dhar Dubey education qualification)
नरेंद्र नाथ धर दुबे ने अपनी प्रारंभिक स्कूलों की शिक्षा अपने गांव से ही पूरी की उसके बाद उच्च स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के लिए उन्होंने अपने गांव से शहर चले आए और दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की।
आपको बता दे की इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एंट्रेंस एग्जाम में दूसरा स्थान प्राप्त किया था जिसे भारत का ऑक्सफोर्ड भी कहा जाता है। इतना ही नहीं इसके लावे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भी उनका सिलेक्शन हो गया था जहां इन्हें हॉस्टल और कैंटीन की सुविधा भी थी। लेकिन इनकी मां ने अपने से दूर कहीं जाने ही नहीं दिया और इस कारण से उन्हें अपने शहर के विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन के पढ़ाई पूरी करनी पड़ी।
नरेंद्र नाथ धर दुबे का करियर (Narendra Nath Dhar Dubey carrie)।
नरेंद्र नाथ घर दुबे शुरुआती में एक शिक्षक बनना चाहते थे लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और वह नहीं बन पाए। इसके बाद 1984 में उनके एक दोस्त ने उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस की परीक्षा देने की सुझाव दी। लकिली वी उन्होंने इस एग्जाम को पास करके और एक सब इंस्पेक्टर के रूप में काम किया जहां उन्हें ₹80 प्रतिमा वेतन दी जाती थी।
उसके बाद 1984 में उनका सिलेक्शन UPSC के माध्यम से हुआ जिसमें उन्हें बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के राजपत्रित अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया।
नरेंद्र की पहली पोस्ट इंग राजस्थान के जैसलमेर में दिया गया जहां का टेंपरेचर 54 डिग्री सेल्सियस तक रहती है यहां पर उन्होंने 3 सालों तक बॉर्डर पर ड्यूटी। उसके बाद जोधपुर में एक प्रशिक्षक के रूप में काम किया उसके बाद पंजाब बॉर्डर फिर दार्जिलिंग यानी कि नॉर्थ बंगाल के बॉर्डर पर तने याद किया गया।
जिसमें इनका पोस्टिंग जम्मू कश्मीर में हुआ था उसमें जम्मू कश्मीर है पाकिस्तानियों की खुश बैठे बहुत ज्यादा तक पड़ गई थी और जम्मू कश्मीर के कई क्षेत्र फैल चुके थे। जिस कारण से भारत में लगातार हमला कर पता रहता था। ऐसे में इस समस्या से सुलझाने के लिए कश्मीर से आतंकवाद को खत्म करने में नरेंद्र नाथ धर दुबे का महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
कश्मीर और गाजी बाबा ऑपरेशन (Kashmir and Ghazi Baba Operation)
उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड 2000 में आया जब इन्हें श्रीनगर के अर्बन टेररिज्म से निपटने के लिए नियुक्त किया गया। इसी दौरान भारत के संसद भवन पर हमला हुआ था और इसका मास्टरमाइंड जैश ए मोहम्मद कमांडर गाजी बाबा था।
उसके बाद साल 2003 में श्रीनगर में छिपे गाजी बाबा और उनके साथियों को करण नगर के एक चैंबर में छिपे लोगों को घेर लिया। इस ऑपरेशन के दौरान नरेंद्र नाथ धर दुबे को साथ गोली लगी थी फिर भी वह पीछे नहीं आते और अंततः गाजी बाबा मर गया और आपको बता दे कि यह बीएसएफ के इतिहास में सबसे सफल ऑपरेशन रहा है।
गाजी बाबा ऑपरेशन में घायल होने के बाद उन्हें रिकवर होने में 4 साल का समय लग गया। और आपको बता दे कि उनके शरीर में एक गोली अभी भी फांसी हुई है।
NIA में उन्होंने इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट और इन्वेस्टीगेशन डिपार्टमेंट के साथ-साथ डीआईजी एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में महत्वपूर्ण कार्य किए। उसके बाद पाक कश्मीर पत्थर बाजों के खिलाफ टेरर फंड की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उसके बाद साल 2022 में उन्होंने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स से सेवानिवृत्ति हो गए।
नरेंद्र नाथ धर दुबे पर लिखी गई कितवे और फिल्म (Books and films written on Narendra Nath Dhar Dubey)
नरेंद्र नाथ धर दुबे का जीवन किसी फिल्मी स्टोरी से काम नहीं है आपको बता दें कि इनके लाइफ पर एक बायोपिक फिल्म बनाई गई है और उसे फिल्म का नाम ‘ ग्राउंड जीरो’ रखा गया है और इस फिल्म में मुख्य अभिनेता के रूप में इमरान हाशमी है जो नरेंद्र नाथ धर दुबे की भूमिका निभा रहा है। और उनके लाइफ पर एक किताबें भी लिखी गई है सी द लवर बॉय का बहावलपुर’ और इस किताब का लेखक राहुल पांडे है।
नरेंद्र नाथ धर दुबे की कुछ रोचक जानकारियां (Narendra Nath Dhar Dubey some interesting fact)
- गाजी बाबा ऑपरेशन सफल होने के बाद इनकी अद्वितीय अदम्य साहस के लिए साल 2005 में राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के द्वारा कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था।
- नरेंद्र नाथ घर दुबे को डिफेंस मेडल से सम्मानित किया जो की मुश्किल से CAPF के अधिकारियों को मिलता है। इसके अलावा उनके टीम के 10 लोगों को राष्ट्रीय पुलिस पदक से सम्मानित किया गया और आठ लोगों को “आउट ऑफ़ टर्न” प्रमोशन दी गई।
- गाजी बाबा ऑपरेशन के दौरान उनके शरीर में साथ गोली लगी थी जिसमें से एक गोली अभी भी उनके शरीर में ही फंसी हुई है।
- साल 2009 में उन्हें NIA में शामिल किया गया आपको बता दे की NIA मैं शामिल होने वाला पहला गैर आईपीएस अधिकारी रहे है।



