मेजर मोहित शर्मा का शिक्षा,उम्र, करियर ,परिवार और उनसे संबंधित अन्य जानकारियां, जैसे अंडर कवर ऑपरेशन और इन से जुड़ी इंटरेस्टिंग जानकारियां।

मेजर मोहित शर्मा भारतीय सेवा के एक बहादुर ऑफिसर थे। उन्हें अपनी असाधारण वीरता और नेतृत्व के लिए हमेशा आद किए जाते रहेंगे। वह इंडियन आर्मी की सबसे प्रतिशत पहले स्पेशल फोर्स के सदस्य थे।
वह जम्मू कश्मीर में आतंकवाद के विरुद्ध उन्होंने ने आदित्य साहस का परिचय दिखाते हुए जम्मू कश्मीर, कुपवाड़ा में वह अपनी टीम का नेतृत्व करते हुए आतंकवादियों को मार गिराया और अपनी साथियों का जान बचाई। लेकिन इस दौरान गंभीर रूप से घायल हो गया। ऑरेंज वीरगति को प्राप्त हो गए। इस बलिदान और बेटा के लिए भारत सरकार ने उन्हें भारत के सर्वोच्च परमवीर चक्र से सम्मानित किया।
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मेजर मोहित शर्मा का जन्म और प्रारंभिक जीवन (major Mohit Sharma work and early life)
मेजर मोहित शर्मा का जन्म 13 जनवरी 1978 को शुक्रवार के दिन हरियाणा के रोहतक जिला में हुआ था। उनके पिताजी का नाम राजेंद्र प्रसाद शर्मा है जो एक गवर्नमेंट ऑफिसर थे और उनकी माता जी का नाम सुशील शर्मा है और वह एक हाउसवाइफ है। उनके माता-पिता उन्हें प्यार से चिंटू नाम से बुलाया करते थे। और उनके भाई का नाम माधुरी शर्मा है। उनका परिवार मुख्य रूप से हरियाणा के रहने वाले हैं लेकिन फिलहाल हुआ उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद में बस गए है।
मेजर मोहित शर्मा का शिक्षा (major Mohit Sharma education qualification)
मोहित शर्मा की प्रारंभिक स्कूलों की शिक्षा मानव स्थलीय स्कूल साउथ एक्सटेंशन दिल्ली से 1983 से 1987 तक पूरी की उसके बाद 1987 से 1988 तक होली एंजेल्स स्कूल साहिबाबाद से कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। 1988 से 1995 तक दिल्ली पब्लिक स्कूल गाजियाबाद में पढ़ाई की। कॉलेज और यूनिवर्सिटी की पढ़ाई राष्ट्रीय सुरक्षा अकादमी पुणे से पूरी की।
मेजर मोहित शर्मा का करियर (major Mohit Sharma carrier)
मोहित शर्मा का शुरुआती से ही इसका मकसद क्लियर था कि उसे भारतीय सेवा में जाना है इसलिए उन्होंने SSB की परीक्षा दी। परीक्षा पास करने के बाद उन्हें ट्रेनिंग के लिए नेशनल डिफेंस अकैडमी पुणे में प्रवेश भेजा गया।
एनडीए में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मोहित को 1998 में भारतीय सी एकेडमी में दाखिला लिए जहां उन्हें फिजिकल ट्रेनिंग दी गई। अकादमी में उनकी बेहतर परफॉर्मेंस को देखते हुए खोज का फिर प्रभावित हुआ और उन्हें चुनिंदा लोगों में शामिल कर लिया गया। उसके बाद उसे समय के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री की आर नारायण से राष्ट्रपति भवन में मिलने का मौका मिला।
1999 में ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें हैदराबाद में मद्रास रेजीमेंट के पांचवें बटालियन में लेफ्टिनेंट के पद पर तैनात किया गया। 3 साल तक सेवा देने के बाद उन्होंने पैरा कमांडो में शामिल होने का विकल्प चुनाव उसके बाद जून 2003 में वह एक ट्रेंड पर कमांडो बन गए। उसके बाद इसी साल के आखिरी महीने में उन्हें कप्तान के पद पर तैनात किया गया।
प्रमोशन के बाद मोहित शर्मा को कश्मीर में तैनात किया गया जहां उनकी वीरता और समर्पण का परिचय दिया। साल 2004 में फेसबुक मुजाहिदीन कि ग्रुप में घुसपैठ और उसकी गतिविधियों की जानकारी प्राप्त करने के लिए यह मिशन उन्हें सोपा गया। मोहित शर्मा इफ्तिखार भट्ट नाम के दो आतंकवादियों के साथ संबंध बनाने में सफल रहे। उसकी वेशभूषा में ढलने के लिए उन्होंने अपने दाढ़ी बाल लंबे किए ताकि वह ग्रुप में आसानी से शामिल हो सके।
मोहित शर्मा ने अपनी मनगढ़ंत कहानियों से हिज्बुल मुजाहिदीन को अखिल दिल दिया की वह इंडियन आर्मी के खिलाफ है और उसे पर हमला करने की योजना बना रहा। ऐसा कहानी उन्होंने इसलिए बनाया की साल 2001 में इंडियन आर्मी ने उसके भाई की हत्या कर दी थी। इस प्रकार से हुआ उसे आतंकवादियों की ग्रुप में शामिल हो गए।
उसके बाद मोहित का मुलाकात दो आतंकवादियों से करवाई गई जिसका नाम अब्बू तोरारा और अबू साबजार से हुई। उन दोनों को इन्होंने बताया कि हम एक सेवा की चौकी पर हमला करना चाहते हैं इसके लिए आपकी मदद की आवश्यकता है। उसके बाद आतंकवादियों ने हमले के लिए तीन और आतंकवादि और ग्रेनाइट का इंतजाम किया। लेकिन हमले से पहले मोहित शर्मा का नोंकझ चौक आतंकवादियों के साथ हो गया उसके बाद उन्होंने आतंकवादियों को मार डाला।
उसके बाद साल 2005 में मोहित शर्मा को मेजर के पद पर प्रमोट किया गया और कश्मीर की बागडोर उन्हें संभालने को दिया गया। आपको पता था कि इस गुप्त मिशन के लिए उन्हें सेना पदक से भी सम्मानित किया गया था।
मेजर मोहित शर्मा के शहीद होने के बाद भारत सरकार ने 15 अगस्त 2009 को देश के सर्वोच्च शांति कालीन वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया जाएगा। उसके बाद 26 जनवरी 2010 को उनकी पत्नी मेजर ऋषिमा शर्मा ने उसे समय की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से पुरस्कार ग्रहण किया।
मेजर मोहित शर्मा की मृत्यु (Main Yaar Mohit Sharma’s death)
मेजर मोहित शर्मा के बारे में जितना भी सराहना करें वह भी काम है, उनकी जर्नी लोगों को इतना इंस्पायर करती है कि उनकी कहानी सुनकर लोगों के अंदर जोश आ जाता है। मोहित शर्मा जब उत्तरी कश्मीर में कुपवाड़ा सेक्टर में ब्रावो असॉल्ट टीम का नेतृत्व करते हुए 21 मार्च 2009 को आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गए।
मेजर मोहित शर्मा का विवाह (Major Mohit Sharma marriage)
मेजर मोहित शर्मा जो एक रॉ एजेंट है और उन्होंने कई सारे अंडर कवर ऑप्रेशन किया। उनका विवाह हो चुका था लेकिन उनकी पत्नी के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसकी जानकारी मिलते हैं आपको जल्द से जल्द अपडेट करेंगे। उनकी पत्नी का नाम की जानकारी इमेज और उनकी पत्नी का नाम मेजर ऋषिमा शर्मा है।
मोहित शर्मा का पुरस्कार और उपलब्धियां (Mohit Sharma award and achievements)
- मोहित शर्मा को साल 2005 में सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था।
- मेजर मोहित शर्मा की मृत्यु के बाद भारत सरकार उनकी बेटा और साहस के लिए 15 अगस्त 2009 को अशोक चक्र से सम्मानित किया था।
निष्कर्ष
मेजर मोहित शर्मा का जीवनी देशभक्ति, क्रमनिष्ठा और अद्वितीय साहस का प्रेरणादायक उदाहरण है, जोहर भारतीय को अपने देश के प्रति समर्पण और देशभक्ति की भावना उत्पन्न करती है। इनके जीवन सिर्फ प्रवास होकर कई लोग हैं जो भारतीय सेना में जाना चाहते है।




